मुसाफिर Dil | श्रीनाथ चौधरी | पुस्तक समीक्षा

कहानी: 4.5/5
पात्र: 4.5/5
लेखन शैली: 3.5/5
उत्कर्ष: 4.5/5
मनोरंजन: 4/5 “मुसाफिर Dil” एक नवोदित कथाकार श्रीनाथ चौधरी की प्रथम रचना है। अतः पाठकों के समक्ष कथाकार का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करना आवश्यक हो जाता है। श्रीनाथ चौधरी राजस्थान के नाथद्वारा शहर के मूल निवासी हैं। उन्होंने शारीरिक शिक्षा ग्रहण की है तथा वह बैडमिंटन के कुशल खिलाड़ी हैं और वर्तमान में एमकॉम में अध्ययनरत हैं। उनके अनुसार उन्हें लेखन की प्रेरणा “भगवद गीता” को पढ़ने के बाद प्राप्त हुई। वह 22 वर्षीय ऐसे कथाकार हैं जिन्हें “मुसाफिर Dil” प्रकाशित होने से 2 वर्ष पूर्व तक यह भी नहीं पता था कि उपन्यास क्या होता है?

उनके “मुसाफिर Dil” का प्रकाशन 2019 में बिगफुट प्रकाशन द्वारा किया गया है। यह उपन्यास प्रेम एवं रोमांच पर आधारित है जैसा कि उपन्यासकार ने मुख पृष्ठ पर “जर्नी फुल ऑफ लव एंड एडवेंचर” लिख कर स्पष्ट कर दिया है।

इसका कथानक राजस्थान के खूबसूरत शहर उदयपुर को आधार बनाकर लिखा गया है। उपन्यास के दो प्रमुख पात्र वैदेही और युवान एक दूसरे से सर्वथा अपरिचित हैं। वैदेही अपने पिता के स्थानांतरण के कारण जयपुर से उदयपुर आयी है, इसलिए उसके लिए यह शहर एकदम नया है जबकि युवान उदयपुर का ही एक धनी युवक है|

दोनों की भेंट आश्चर्यजनक परिस्थितियों में एक कैफे में होती है, दोनों ही अपरिचित हैं और एक फटा हुआ पत्र दोनों के मिलाप का कारण बन जाता है | युवान स्वप्न दर्शी युवक है और वह अपने सपनों को पूरा भी करना चाहता है परंतु अकेलापन उसके जीवन में अंधकार की तरह फैला हुआ है | वैदेही मध्यम वर्गीय परिवार की सुलझी हुई युवती है और बी.कॉम. फाइनल ईयर की छात्रा है| युवान और वैदेही दोनों की मित्रता एक कोचिंग सेंटर में होती है और धीरे-धीरे यही मित्रता प्रेम में परिवर्तित हो जाती है|

 इसी दौरान परस्पर कुछ गलतफ़हमियाँ हो जाती हैं और इनके बीच दूरियां आ जाती हैं| युवान इन्हें दूर करने का भरसक प्रयास करता है परंतु, वैदेही उसकी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं होती| इस दौरान दोनों के जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आते हैं| एक के बाद एक घटनाएं घटित होती हैं और एक दिन ऐसा भी आता है जब युवान अचानक उदयपुर छोड़कर चला जाता है और अब वह अपना पूरा ध्यान पर्वतारोहण पर केंद्रित कर देता है|

तदुपरांत परिस्थितियां बहुत तेज़ी से करवट लेती हैं और वैदेही के मन में पनपी सारी गलतफ़हमियाँ दूर हो जाती हैं तथा वह युवान से मिलने के लिए बेचैन हो उठती है परंतु, युवान कहां है और किस परिस्थिति में है यह कोई भी नहीं जानता| युवान के मित्र शौर्य और विशाल वैदेही के साथ मिलकर अंततः यह पता लगाने में सफल हो जाते हैं कि वह इस समय उत्तरकाशी के पर्वतारोहण संस्थान में है परंतु, वहां मोबाइल इत्यादि की सुविधा ना मिलने के कारण इन मित्रों का संपर्क युवान से नहीं हो पाता, और एक दिन टीवी पर समाचार सुनकर सभी को ज्ञात होता है कि युवान का चयन एवरेस्ट विजय के लिए जाने वाली टीम में हो गया है|

इसी पर्वतारोहण संस्थान में युवान की मित्रता ज़ारा नामक युवती से होती है| इस दौरान अनेक घटनाएं घटित होती हैं जो कहानी को उत्तरोत्तर आगे बढ़ाती हैं तथा उपन्यास को पूर्णता की ओर अग्रसर करती हैं| इस मुख्य कथा धारा के साथ-साथ युवान के मित्र विशाल की मर्मस्पर्शी मूक प्रेम कथा से भी पाठकों का परिचय होता है।

“मुसाफिर Dil” एक विशुद्ध और साफ-सुथरी प्रेम कथा है जो मर्यादा में रहकर परिपक्व होती है और उसमें दैहिक आकर्षण मात्र ना होकर आत्मिक प्रेम के दर्शन पाठकों को होते हैं | यह एक दूसरे के प्रति अटूट प्रेम, त्याग और सेवा भाव की कथा है, जिसका भरपूर आनंद पाठकों को पूरा उपन्यास पढ़कर ही प्राप्त हो सकता है। 

यदि श्रीनाथ चौधरी की भाषा और लेखन-शैली की बात की जाए तो उनकी भाषा सीधी सरल दैनिक जीवन में प्रयोग की जाने वाली खड़ी बोली है जिसमें अंग्रेजी के ऐसे शब्दों की भरमार है जिनके प्रयोग के बिना आज हम अपनी बात पाठकों तक पहुंचाने में स्वयं को असमर्थ पाते हैं | ऐसी भाषा प्रयोग से उपन्यास में सजीवता और वास्तविकता स्वत: आ गई है क्योंकि शहरों के मध्यम वर्गीय परिवारों द्वारा ऐसी ही भाषा का प्रयोग किया जाता है |

उपन्यास अनेक अध्यायों में विभाजित है और प्रत्येक अध्याय का शीर्षक उसके पात्र के नाम पर है | उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता है उसकी अनूठी आत्मकथात्मक शैली – प्रत्येक पात्र अपनी कहानी स्वयं कहता है और कथानक को विस्तार प्रदान करता है।

आंतरिक और बाह्य व्यक्तित्व का चित्र उपन्यासकार के लेखन की एक अन्य विशेषता है | एक उदाहरण प्रस्तुत है जो उनके लेखन की इस विशेषता को स्पष्ट करता है जैसे – “उसके चेहरे के डिंपल्स बड़े खूबसूरत लगते जैसे चांद पर रहने वाली परी हो। आंखें ऐसी जैसे समुद्र से निकले हुए बेशकीमती मोती। गुलाब की पंखुड़ियों जैसे उसके गुलाबी होंठ।“

इस प्रकार के उदाहरण उपन्यास में स्थान स्थान पर देखे जा सकते हैं। यही नहीं श्रीनाथ चौधरी प्रकृति प्रेमी भी हैं इसीलिए उपन्यास में उन्होंने मानव जीवन को प्रकृति से जोड़ा है और उसके बहुत सुंदर चित्र प्रस्तुत किए हैं जैसे – “प्रकृति की सबसे सुंदर और अद्भुत रचना सूर्य इस काली रात को चीरते हुए बाहर निकल रहा था। कहते हैं सूर्य सकारात्मक ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है और सूर्य की किरणों में हर अंधकार को मिटाने की शक्ति होती है, चाहे वह अंधकार धरती का हो या हमारे मन का।“

उपन्यासकार श्रीनाथ चौधरी के उपन्यास “मुसाफिर Dil” में भाव प्रवणता का गुण सर्वत्र विद्यमान है | पात्रों के जीवन में, चाहे वह युवान और वैदेही हों, विशाल और नायरा हों अथवा जाया हो, जहां भी बिछोह की स्थिति उत्पन्न हुई है, वे प्रसंग इतने मर्मस्पर्शी बन पड़े हैं कि आप अपनी आंखों को आसुओं से भीगने से रोक ही नहीं पाएंगे।

उपन्यास का कुछ अंश यात्रा वृत्तांत जैसा है क्योंकि इसमें कथाकार ने पर्वतारोहण के प्रशिक्षण से लेकर एवरेस्ट विजय तक की कथा को बहुत विस्तार से मनोहारी और प्रेरक रूप में प्रस्तुत किया है। इसमें संबंधों की घनिष्ठता है, जीवन की कठिनाइयां है, तो उन कठिनाइयों से उबरने की कला को भी दर्शाया गया है।

श्रीनाथ चौधरी के उपन्यास “मुसाफिर Dil” को यदि पात्रों की संख्या की दृष्टि से देखा जाए तो इसमें पात्रों की संख्या अधिक नहीं है। उपन्यास के सभी पात्रों की अपनी-अपनी वैयक्तिक विशेषताएं हैं | यह सभी मन को लुभाते हैं और कथानक को उसकी चरम परिणति तक पहुंचाने में पूर्णत: सफल भी होते हैं।

उपन्यास का केंद्र बिंदु युवान और वैदेही हैं अतः वही मुख्य पात्र हैं। इसके अतिरिक्त युवान के मित्र विशाल और शौर्य, कैफे की स्वामिनी अंकिता, ज़ारा आदि की भूमिका भी महत्वपूर्ण है और इन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। उपन्यास की मुख्य कहानी के साथ-साथ विशाल और नायरा की मूक प्रेम कथा भी उपन्यास का एक महत्वपूर्ण अंग है। कर्नल अभय, विराट सिंह, डाक्टर लीन, शेरपा आदि उपन्यास के अन्य उल्लेखनीय पात्र हैं।

“मुसाफिर Dil” का आरंभ उदयपुर शहर से होता है तदुपरांत कहानी उत्तरकाशी के पर्वतारोहण संस्थान एन.आई.एम अर्थात नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से होती हुई नेपाल के काठमांडू शहर में पूर्णता को प्राप्त होती है | इस दौरान उपन्यासकार श्रीनाथ चौधरी ने प्रत्येक स्थान के प्राकृतिक सौंदर्य, वहां के जनजीवन तथा पर्वतारोहण से संबंधित छोटी से छोटी जानकारी भी अपने पाठकों तक पहुंचाने का सफल प्रयास किया है |

ये वर्णन उपन्यास को रोचक बनाते हैं और निराश व्यक्ति के जीवन में आशा का संचार करते हैं। एक उदाहरण प्रस्तुत है – “क्यूँकि पहाड़ और ज़िन्दगी एक जैसी ही होती है, दोनों पर जीत हासिल करने के लिए खुद पर भरोसा होना बेहद ज़रूरी है।”

जहां तक उपन्यास के शीर्षक “मुसाफिर Dil” का प्रश्न है यह मन में कौतूहल जगाता है परंतु फिर भी कथानक के सर्वथा अनुकूल है, क्योंकि उपन्यास के अधिकांश पात्रों के भीतर एक मुसाफिर छुपा हुआ है जो अपने-अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक अनवरत यात्रा की ओर बढ़ते जाते हैं |

सच कहूं तो यह उपन्यास तपते रेगिस्तान में ठंडी हवा के झोंके की तरह सुखद अनुभूति कराता है | इस उपन्यास में कौतूहल, भावनाओं की मार्मिकता, प्रकृति का सौंदर्य, युवान के मित्र शौर्य का चंचल स्वभाव आदि अनेक ऐसे प्रसंग हैं जो इसे रोचक और मनोरंजक बनाते हैं |

“मुसाफिर Dil” की कहानी मध्यमवर्गीय परिवारों की कहानी है जो हमारे और आपके परिवारों से जन्मी प्रतीत होती है। यह उपन्यास उन युवाओं में लोकप्रियता प्राप्त करने में पूर्णत: समर्थ है जो सीधी सच्ची प्रेम कथाएं पढ़ने के साथ-साथ प्रकृति से जुड़े हुए हैं और पर्वतारोहण में भी रुचि रखते हैं।

उपन्यासकार श्री नाथ चौधरी का यह पहला उपन्यास है अतः इसमें संपादन संबंधी ग़लतियां – विशेष रूप से मात्रा और व्याकरण संबंधी त्रुटियां बहुत है। परंतु फिर भी उनका लेखन प्रभावित करता है। उनका यह प्रथम प्रयास सराहनीय है | मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि हिंदी उपन्यास लेखन के क्षेत्र में श्रीनाथ चौधरी एक सफल और लोकप्रिय उपन्यासकार के रूप में स्वयं को शीघ्र ही स्थापित करने में सफल हो सकेंगे। मैं उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हूं।

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